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अपनों से प्यार कैसे करे


अपनों से प्यार कैसे करे 

अपनों से प्यार कैसे करे


महान संत एकनाथ से मिलने के लिए 1 दिन नगर सेठ उनके घर पहुंचा | संत एकनाथ ने सेठ का स्वागत करते हुए उनके आने का कारण पूछा: 

सेठ ने अत्यंत दुखी स्वर में बताया कि पिछले कुछ समय से उसका व्यापार ठप पड़ा है वह अत्यंत मानसिक दबाव में है इसकी वजह से उसके अंदर बार-बार

आत्महत्या कर लेने का विचार उत्पन्न हो रहा है |

अपनों से प्यार कैसे करे 


 एकनाथ ने मधुर  भाव से पूछा कि क्या वह अपने परिजनों और अपने अधीन काम करने वालों से प्रेम करता है

सेठ सोच में पड़ गया फिर कटु स्वर में कहा कि उसके परिजन केवल उसके पैसों से प्यार करते हैं उसके कर्मचारी भी कामचोर और झगड़ालू हैं |

एकनाथ को माजरा समझ में आ गया उन्होंने उसे समझाते हुए कहा कि वह अगले 30 दिनों के लिए आत्महत्या का विचार त्याग कर उनके कहे अनुसार कार्य  करें

पूरे 1 महीने के बाद सेठ संत एकनाथ के पास वापस आया और उनके चरणों में गिर पड़ा उसने आत्महत्या का विचार त्याग दिया था उसका व्यापार भी

चल निकला था और उसके परिजन और कर्मचारी भी चमत्कारिक रूप से उसके साथ सहयोग करने लगे थे |

दरअसल यह कोई चमत्कार नहीं था यह उस परिवर्तन की सहायक प्रक्रिया मात्र थी जो उसके आचरण में पिछले 30 दिनों में दिखा था |

जब कोई व्यक्ति सवार से वशीभूत हो केवल अपने हित में उद्यम करता है तो वह अपने हित का सबसे बड़ा नुकसान कर ही लेता है |

क्योंकि ऐसा कर वह अपने परिजनों और शुभचिंतकों के सहयोग से वंचित हो जाता है किसी बड़ी कठिनाई के उपस्थित हो जाने पर वह अपने आपको

अपनों से प्यार कैसे करे 


असहाय और अकेला समझता है जिसकी वजह से कुछ मामलों में आत्महत्या तक की प्रवृत्ति पनपने लगती है |

हमें अपने आसपास मित्रों शुभचिंतकों का सुरक्षा चक्र बना कर रखना चाहिए लेकिन इसके लिए केवल प्राप्त
करने की प्रवृत्ति से ऊपर उठना होगा और

देने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी |

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